भारतीय राजनीति में अटल युग का अंत…..

Atal bihari vajpayee

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का आज शाम 5 बजकर 5 मिनट में निधन हो गया, वो कल से लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर थे । अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसम्बर 1924 को हुआ था। अटल बिहारी वाजपेयी के निधन के चलते शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सभी बाजार बंद रहेंगे.

केंद्र सरकार ने अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर सात दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है. इस दौरान राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा.वाजपेयी का पार्थिव शरीर सुबह नौ बजे बीजेपी मुख्यालय ले जाया जाएगा. यहां उनका पार्थिव शरीर आम लोगों के अंतिम संस्कार के लिए रखा जाएगा.

सूत्रों के मुताबिक अटल बिहारी वाजपेयी का अंंतिम संस्कार दिल्ली के स्मृति स्थल के पास किया जा सकता है.

93 वर्षीय भारतीय जनता पार्टी के इस दिग्गज नेता को किडनी ट्रैक्ट इंफेक्शन, यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन, पेशाब आने में दिक्कत और सीने में जकड़न की शिकायत के बाद 11 जून को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, दिल्ली (एम्स) में भर्ती कराया गया था।

मधुमेह से ग्रस्त वाजपेयी की एक ही किडनी काम करती थी । इसके अलावा अटल बिहारी वाजपेयी जी डिमेंशिया रोग से पीड़ित थे । डिमेंशिया में इंसान की याददाश्त कमजोर हो जाती है और वह अपने रोजमर्रा के काम भी ठीक से नहीं कर पाता है और वह हर बात भूलता जाता है।

एम्स में भर्ती किए जाने के बाद से लोगों का अटल बिहारी वाजपेयी से मिलने का तांता लगा हुआ था .अटल बिहारी वाजपेयी की हालत बिगड़ने पर बुधवार की शाम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें देखने के लिए एम्स पहुंचे थे। वहीं तभी से नेताओं का एम्स जाने का सिलसिला जारी रहा था।

अटल जी की हालत बिगड़ने पर देश भर के लोग उनके ठीक होने के लिए दुआ, प्रार्थना कर रहे थे।

अपने राजनैतिक सफ़र में वाजपेयी जी सबसे आदर्शवादी व प्रशंसनीय राजनेता थे.. उनके बहुत से कामों की वजह से देश आज इस मुकाम पर है. जवाहरलाल नेहरु के बाद अगर कोई 3 बार प्रधानमंत्री बना है तो वो अटल जी ही है.

अटल जी बहुमुखी प्रतिभा के धनि थे, वे बहुत अच्छे कवी थे जो राजनीती पर भी अपनी कविता और व्यंग्य से सबको आश्चर्यचकित कर देते थे, उनकी बहुत सी रचनाएँ पब्लिश हुई जिन्हें आज भी लोग पढ़ते है. अटल जी को अपनी मातृभाषा हिंदी से भी बेहद प्रेम था , अटल जी पहले राजनेता बने, जिन्होंने यू एन जनरल असेंबली में हिंदी में भाषण दिया था.

अटल जी पहली बार सिर्फ 13 दिन के लिए प्रधानमंत्री बने थे. इसके 1 साल के बाद वे फिर प्रधानमंत्री बने लेकिन इस बार भी उनका ये सफ़र एक साल का रहा. तीसरी बार अटल जी जब प्रधानमंत्री बने तब उनका कार्यकाल पूरा 5 साल का रहा और वह पहले ऐसे प्रधानमन्त्री रहे जिन्होने 24 राजनीतिक दलों के साथ गठबंधन बनाया और 5 साल तक सफलतापूर्वक सरकार चलायी।

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