2019 लोकसभा चुनाव: किसे मिलेगा भारतीय जनता का प्यार और किसे मिलेगी धुत्कार?

2019 लोकसभा चुनाव: क्या नरेंद्र मोदी को फिर से जनता का मिलेगा प्यार या जनता उनसे करेगी बेवफाई?

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2019 लोकसभा चुनाव: क्या नरेंद्र मोदी को फिर से जनता का मिलेगा प्यार या जनता उनसे करेगी बेवफाई?

ये एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब खुद प्रधानमंत्री मोदी के पास भी नहीं है. इस सवाल का जवाब अगर किसी के पास है तो वो है वक़्त. ये तो वक़्त ही बता सकता है की इस बार ऊंट किस करवट बैठेगा.

ये बात तो सभी जानते है कि भारत में हर कोई 2 विषयो के बारे में अपने आपको विशेषज्ञ मानता है, पहला क्रिकेट और दूसरा राजनीति. आईये हम सब मिलकर अपने दिमाग के घोड़े दौड़ाते है और इस बात का विश्लेषण करते है कि इस बार किसको प्रधानमंत्री बनना चाहिए और क्यों

अभी हाल ही में चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर का सर्वे आया है, उसके अनुसार वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सबसे ज्यादा लोगो ने फिर से प्रधानमंत्री पद का सबसे उपयुक्त दावेदार माना है. चलिए हम उन्ही से शुरुवात करते है कि उन्हें क्यों फिर से प्रधानमंत्री बनना चाहिए:

  • नरेंद्र मोदी की लीडरशिप (leadership of Narendra Modi): यह बात तो हम सभी जानते और मानते है कि नरेंद्र मोदी एक अच्छे लीडर और वक़्ता है. विपक्ष का कोई भी नेता अकेले अपने दम पर उनका मुक़ाबला नहीं कर सकता. शायद इसी कारण से, 2019 का चुनाव सभी विपक्षी पार्टियाँ नरेंद्र मोदी के विरुद्ध एकजुट होकर लड़ने का बन बना चुकी है. सभी के मन में बस यही सवाल है कि हम ऐसा क्या करे कि नरेंद्र मोदी को एक बार फिर से प्रधानमंत्री बनने से रोका जाये. सभी पार्टियाँ अपने आपसी भेदभाव भूलकर बस मोदी को हराने के लिए एकजुट हो रही है.
  • सोशल मीडिया (Social Media): सभी पार्टियाँ सोशल मीडिया में अपने कार्यों का प्रचार प्रसार करके या दूसरी पार्टियों के बारे में नकारात्मक खबर दिखाकर चुनाव के नतीजों को प्रभावित करने की कोशिश करती है. 2014 के लोकसभा चुनाव में सोशल मीडिया ने NDA की जीत में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी. इस बार भी भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए की सोशल मीडिया पे अच्छी पकड़ है. पिछली बार की तरह इस बार भी NDA ने शहरी tech savvy youth पे अपनी पकड़ बनायीं हुयी है.
  • हिन्दुतवा के प्रति रुझान: ये तो हम सभी जानते है की बीजेपी एकमात्र ऐसी पार्टी है जिसका हिन्दुतवा के प्रति रुझान रहा है और उनका सबसे बड़ा वोट बैंक भी हिन्दू ही है. बाकि सभी पार्टियाँ मुस्लिमों और अल्पसंख्यों के वोटों के बलबूते जीतती आयी है. मुस्लिमों के हितों का ख्याल रखने के चक्कर में बाकि सभी पार्टियां हिन्दुओ के हितों को अनदेखा करती आयी हैं और इसी कारण से अब हिन्दू समाज एकजुट होकर बीजेपी का साथ दे रहा है.अन्य पार्टियों के नेता भी अब टोपियाँ उतारकर मंदिर मंदिर जाकर पूजा करके बीजेपी के वोट बैंक को तोड़ने की कोशिश कर रहें है लेकिन लगता नहीं की वो लोग इतनी जल्दी हिन्दू समाज को अपने पक्ष में मोड़ने में कामयाब हो पाएंगे.
  • प्रवक्ता (Spokes Person): किसी भी पार्टी के प्रवक्ता उस पार्टी द्वारा किये हुए कार्यो को न्यूज़ चैनल द्वारा जनता के सामने लाते है. एक अच्छा वक्ता ही एक अच्छा नेता हो सकता है. एक अच्छा वक्ता ही अपनी बात जनता को समझा सकता है और जनता को अपनी बातों से आकर्षित कर सकता है. बीजेपी एकमात्र ऐसी पार्टी है जिसके अधिकतर नेता अच्छे वक्ता है. नरेंद्र मोदी, सुषमा स्वराज, संबित पात्रा, अरुण जेटली, अमित शाह, योगी आदित्य नाथ सभी अच्छे वक्ता है. और इसी कारण से हमें लगता है की 2019 में भी बीजेपी के नेतृत्व वाली NDA की ही सरकार बनेगी.
  • विपक्ष की दलीलों में कमी- विपक्ष सरकार के विरुद्ध मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाने में नाकामयाब रहा है. चाहे फिर वो demonetization का मुद्दा हो या काले धन का, विपक्ष अपना पक्ष जनता में सामने जोरदार तरीके से रखने में नाकामयाब रहा है.

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